ग़ज़ल
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निकल चले तो निकल चले हम बिना इजाज़त हमारा क्या है
न कोई आगे न कोई पीछे हमारी बाबत, हमारा क्या है
तुम्हारी दुनिया बहुत अलग है, हमारी दुनिया अलग है तुमसे
तुम्हें मुबारक तुम्हारी दुनिया रहो सलामत, हमारा क्या है
तलाश जारी रही युगों से है रूह अपनी कि जिस्म अपना,
पता अभी तक नहीं चला है कि दर-हक़ीक़त हमारा क्या है
हमें पता है नहीं था आसाँ वहाँ पहुँचना जहाँ कि तुम हो,
तुम्हारी कोशिश तुम्हारी मिहनत तुम्हारी हिम्मत, हमारा क्या है
फ़क़त रहे हैं हम एक जरिया जो कुछ हुआ है वो तय-शुदा था
तुम्हें मयस्सर हुआ है जो कुछ तुम्हारी किस्मत, हमारा क्या है
✍️ संजीव प्रभाकर
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